जीत सिंह नेगी जी द्वारा लिखा गया ,पारम्परिक गढ़वाली गीत गीत जिसको गाया है , रेखा धस्माना उनियाल जी ने। गीत के बोल हैं “हे दर्जी दिदा मैकू तू अंगडी बणे दे”
हे दर्जी दिदा मैकू तू अंगड़ी बणैं दे,
मेरी घाघरी पर चमकदार मगज़ लगे दे।
हे दर्जी दिदा मैकू तू अंगड़ी बणैं दे।
मेरी घाघरी पर चमकदार मगज़ लगे दे।
मिन आज नैनी डांडा देवी का पास जाण,
देवी का नौकु बुगठ्या मिन आज वख चडाँण।।
मिन आज नैनी डांडा देवी का पास जाण।
देवी का नौकु बुगठ्या मिन आज वख चडाँण।
इन आज मन च मेरु सोंजड्या भी मिलालु,
सोंजड्या मेरी अंगडी घाघरी पर मोहेलु।
ये घाघरी पर नौ गजा कू खोल लगे दे,
मेरी घाघरी पर चमकदार मगज़ लगे दे।
हे दर्जी दिदा मैकू तू अंगड़ी बणैं दे ,
मेरी घाघरी पर चमकदार मगज़ लगे दे।
इन फिट दरजी दादा अंगड़ी सीली तू,
मोटी सी कमर मा जू पट की चिपकी जौ ,
इन फिट दरजी दादा अंगड़ी सीली तू।
मुट्ठी सी कमर मा जू पट की चिपकी जौ
उ म्यारू सोंजड्या त श्रृंगार शौकिया च,
फूलों मा वेकु प्यार रंगीला मन वलु च।
ईं अंगडी पर फूल दार तैणी लगे दे,
मेरी घाघरी पर चमकदार मगज़ लगे दे।
हे दर्जी दिदा मैकू तू अंगड़ी बणै दे,
मेरी घघरी पर चमकदार मगज़ लगे दे।
मे आज रात एक सुपिनु प्यारु होया,
फूलों क बण म गौं मी घघरी घूमे क,
मे आज रात एक सुपिनु प्यारु होया।
फूलों क बण म गौं मी घघरी घूमे क,
उ म्यारा समणी आया बांसुली बजांद।
ईं घाघरी पैरीक नाचण लग्युं च,
मेरी अंगड़ी पर टिच दार बटण लगे दे,
मेरी घाघरी पर चमकदार मगज़ लगे दे।
हे दर्जी दिदा मैकू तू अंगड़ी बणैं दे ,
मेरी घघरी पर चमकदार मगज़ लगे दे।
जन्नी उ म्यारा समणी हैंसदा आला दीदा।
घूँघट क्यांकू करलु चदरि तिनीच,
जन्नी उ म्यारा समणी हैंसदा आला दीदा।
घूँघट क्यांकू करलु चदरि तिनीच,
चदरि हो त इन्नी जु जालीदार हो.
घूँघट बटे उन्कु मुक भल कै दिखे हो।
ये चदरि पर रंगबिरंगी टुफ्की लगे दे,
मेरी घाघरी पर चमकदार मगज़ लगे दे।
हे दर्जी दिदा मैकू तू अंगड़ी बणैं दे।
मेरी घाघरी पर चमकदार मगज़ लगे दे।

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