मुखड़ा -1
पुरुष
तेरी पीडा मा द्वि आंसू मेरा भी
तौरी जला पीडा ना लुकेई
महिला
ज्यूँ हल्कू हवे जालु तेरु भी
द्वि आखर चिठ्ठी मा लेखी देई
पुरुष
तेरी पीडा मा द्वि आंसू मेरा भी
तौरी जला पीडा ना लुकेई-
पीडा ना लुकेई…….
मुखड़ा -2
पुरुष
तख तेरी कलेजी कांडोऽन दुपी हो
यख रो मी फूलो मा हिटणू
न हो कभी अजाणम न हो….न हो
महिला
कखी तेरी आँखी आंसूंन भरी हो
यख रौं मी खित -खित हैसणू
न हो कभी अजाणम न हो…न हो
ज्यू हलकू ह्वे जालू तेरु भी
द्वी आखर चीढ़ी मा लेखी देयी….
पुरुष
तेरी पीडा मा द्वि आंसू मेरा भी
तौरी जला पीडा ना लुकेई
पीडा ना लुकेई…….
मुखड़ा -3
महिला
तख तेरा चूलाऽउन्द आग ना जगी हो
यख रो मी तैंका चढाणो
न हो कभी अजाणम न हो…… न हो
पुरुष
कखी तेरी गोली हो तिसल उबाणी
यख रो मी छामोटा लगाणों
न हो कभी अजाण म न हो न हो
दुःख हलकू हवे जालु तेरु भी
बाटी लेई दुःख ना छुपैई
महिला
तेरी पीडा मा द्वि आंसू मेरा भी
तौरी जला पीडा ना लुकेई
पीडा ना लुकेई….
मुखड़ा -4
पुरुष
कखी तेरी स्याणी हो मै खोज्याणी,
यख छोड़ी द्यूं आस पलणु
न हो कखी अजाण म न हो न हो
महिला
तख तेरा हाथ बटी छुटी जाऊ कलम
यख रो मी चिठ्ठीऽयू जग्वाल्णु
न हो कखी अजाण म न हो न हो
ज्यू हलकू ह्वे जालू तेरु भी
द्वी आखर चीढ़ी मा लेखी देयी….
पुरुष
तेरी पीडा मा द्वि आंसू मेरा भी
तौरी जला पीडा ना लुकेई
पीडा ना लुकेई
.png)
No comments:
Post a Comment